शुक्रवार, 12 जून 2009

धार्मिक स्थल



सोनभद्र में पुरातात्त्विक महत्त्व के तमाम स्थल मौजूद हैं । इसे द्वितीय काशी व् गुप्त काशीके नाम से भी जाता है ।शिवद्वार में उमा माहेश्वर

की दुर्लभ प्रतिमा कंडा कोट, गौरी शंकर ,बरेला,नल राजा ,गोठानी ,गुप्तेश्वर ,दुधवा ,शिवाल्ला गाँव ,मडरा ,एवं रेनुकूट मैं रेनुकेश्वर महादेव का प्रषिद मन्दिर है । इसी तरह शक्तिनगर मै ज्वालामुखी ,कुडारी ,अमिलाधाम ,भवानी गाँव ,मऊ ,समेत कुछ अन्य गाँव मैं शक्तिपीठ के रूप मैं कई देवी मन्दिर मौजूद हैं । इसके अलांवा कुछ अन्य देवी देवताओं की मूर्तियाँ इस जिले के गाँव मैं बिखरी हुई हैं । वहीँ आदिवासी बहुल इलाका होने से यहाँ तमाम जनजातियों के अपने कुल देवी देवता पूजे जाते है । डीह बाबा ,राजा लखन ,मुआ ,मरी समेत तमाम इस तरह के देवी देवता है जो उनके द्वारा पूजे जा रहे है ।

सोनभद्र एक परिचय

जनपद सोनभद्र का श्रीजन चार मार्च १९८९ को तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी द्वारा किया गया । यह जनपद बिहार, झारखण्ड ,छतीस गढ़ , व् मद्यप्रदेश की सीमा से सटा हुआ है । इस जिले में एन .टी .पी.सी, के बीजपुर ,शक्तिनगर में दो विजली घर है । इसके अलावा अनपरा व ओबरा में राज्य सरकार के दो विजली घर हैं । पिपरी व ओबरा में दो पन विजली घर हैं । दुनिया की सबसे बड़ी एलुमिनियम फैक्ट्री हिंडाल्को ,रेणुकूट में स्थापित है । कनोरिया केमिकल्स व कार्बन के कारखाने भी वहा मौजूद हैं। एन .सी .एल की चार कोयला की खुली खदाने हैं । डाला में जेपी की सीमेंट फैक्ट्री तथा ३०० के आस पास क्रसर प्लांट हैं तथा लगभग १००० पत्थर की खदाने हैं । रेनू ,कनहर सोन,विजुल नदियो से व्यापक रूप से बालू की निकासी होती है । इसके अलावा फारेस्ट विभाग भी राजस्व की वसूली करता है । आर्थिक रूप से यह जिला काफी समृद्ध होने के साथ अपने आप में काफी रहस्य व रोमांच समेटे हुए है । चन्र्दकांता की कहानी यहीं के विजयगढ़ किले से सुरु होती है । अगोरी दुर्गे दुराचारी राजा मोलागत के पराभव की कहानी कह रहा है । शिवद्वार , बरेला , गोठानी के शिव मन्दिर के अलावा दर्जन भर शक्ति पीठ जंगलो में मौजूद हैं । इसके अलावा यहाँ पग पग पर तमाम किस्से व कहानिया भरी हैं ।