सोमवार, 31 मई 2010

ये फ्लेम ऑफ़ होप

यह पुस्तिका सिर्फ एक कागज का पन्ना नहीं ,यह दस्तावेज है उस वर्दी का जिसे सिर्फ नफ़रत से देखा जाता है, वह वर्दी जो बड़े बड़ों की नीद गायब कर देती है ,लेकिन सोनभद्र में इस वर्दी ने जहाँ अपने दामन पर कुछ धब्बे लगायें हैं वही तमाम लोगों के दिल में अथाह गहराइयों तक अपने लिए जगह भी बना ली है ,यह पुस्तिका पुलिस के उस चेहरे का एक छोटा सा प्रतिबिम्ब मार्तहै






































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































बुधवार, 3 मार्च 2010

प्रमुख शक्ति पीठ (देवी स्थल)



ज्वालामुखी - यह इस जनपद के प्रमुख शक्ति पीठों में शामिल हैं। जनपद मुख्यालय से लगभग एक सौ दस किलो मीटर दक्षिण शक्तिनगर के पास खड़िया नामक स्थान पर देवी की स्वयं उत्पन्न हुई मूर्ति है। इस देवी मंदिर पर प्रतिवर्ष नवरात्र में बिहार,झारखण्ड,छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश समेेत अन्य स्थानों से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते है। नवरात्रि के अलावा अन्य दिनों में भी भक्तो की भारी भीड़ लगी रहती है। मान्यता है कि ज्वाला देवी की दर्शन मात्र समस्त कष्टों का निवारण होता है। कुण्डवासिनी- (कुड़ारी देवी ) जनपद मुख्यालय से लगभग 70 कि।मी. पश्चिम सोन नद के किनारे कुड़ारी गॉंव स्थित है। यहां मॉं कुण्डवासिनी की मूर्ति एक पहाड़ी नाले के कुण्ड से सैकड़ों वर्ष पूर्व मिली थी। उनकी स्थापना के बाद श्रद्धालुओं द्वारा एक मंदिर का निर्माण कराया गया। प्रत्येक नवरात्र में आदिवासी समुदाय के लोगों द्वारा पारम्परिंक तौर से मॉं की अराधना की जाती है। चैत्र नवरात्र में शुरू मेला 90 दिनों बाद समाप्त होता है। उत्तर प्रदेश का यह पहला स्थान है जहां, लगातार तीन माह तक मेला लगता है। यहां जाने के लिए राबर्ट्सगंज से घोरावल पहुंचकर शिवद्वार के रास्ते सोन नदी पार करके पहुंचा जा सकता हैं। इसके अलावा चोपन व ओबरा से भी कुड़ारी जाया जा सकता है।



मॉॅं अमिला धाम -यह प्रमुख शक्तिपीठ अति नक्सल प्रभावित नगवंा विकास खण्ड के जंगल में स्थित है। यहां क्वार व चैत्र नवरात्र में झारखण्ड, बिहार समेत उत्तर प्रदेश के हजारों आदिवासी परम्परागत ढंग से देवी की पूजा-अर्चना करते हैं। देवी पर चढ़ावेें के रूप में प्रति वर्ष सैकड़ों बकरों की बलि दी जाती है। यहां का पुजारी आदिवासी होता है। यह शक्तिपीठ सोन नदी के किनारे वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग से लगभग 30 किमी। दूर पूरब है। पटवध गॉंव के पास से उतरकर इस स्थान तक पहुंचा जा सकता है। घनघोर, दुर्गम जंगल में स्थित होने के बाद भी यहां आने -जाने वाले निर्भय होकर देवी का दर्शन करते है।



ॅफूलमती महारानी भवानी गॉंव -सोनभद्र जिला मुख्यालय से 22 किमी. पूरब पन्नूगंज थाने के पास भवनी गॉंव स्थित है। जनश्रृति है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व तालाब खुदाई के दौरान छोटक नाई नामक एक व्यक्ति एक डिब्बा पाया। खोलकर देखने पर उसमें अंगूल भर की देवी की मूर्ति थी। गॉंव के लोगों ने इस देवी मूर्ति को तालाब के किनारे एक पेड़ के नीचे रख दिया।कुछ दिनों बाद देवी ने महाराज विजयगढ़ को स्वप्न में मंदिर निर्माण कराने को कहा।इस पर राजा ने एक छोटा सा मंदिर बनवा दिया। मूर्ति को उसी में स्थापित कर दिया गया।आज अंगूल भर की प्रतिमा बढ़कर एक फीट से अधिक उॅंची हो चुकी है। भवानी गॉंव का पूर्व नाम कोरियॉंव था जो देवी के नाम पर भवानी गॉंव हो गया। प्रतिदिन यहां दूर-दराज के हजारों श्रद्धालु मनौती के आते हैं। चण्डिका देवी (चाणी माई सहिजन) -राबर्ट्सगंज से चुर्क मार्ग पर सहिजन गॉंव में मॉं चण्डिका देवी का मंदिर है। यह चाणी माई के नाम से प्रसिद्ध है। इनकी मूर्ति भी तालाब खुदाई के दौरान सैकड़ों वर्ष पूर्व मिली थी। इनके साथ भैरवनाथ की एक दुर्लभ मूर्ति भी मिली थी जो चार वर्ष पूर्व चोरी चली गयी। सन्तानहीन औरतें पुत्र की कामना के लिए यहां भारी संख्या में आती हैं।

शुक्रवार, 10 जुलाई 2009

पञ्चमुखी महादेव

जिला मुख्यालय से सिर्फ़ ६ किलोमीटर दखिण पूरब रऊप गावं की पहाड़ी पर पञ्च मुखी महादेव की अति प्राचीन मूर्ति स्थापित है । पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई का कार्य कराने की बात चल रही है । इस स्थान पर अन्य तमाम दुर्लभ मुर्तिया मिली हैं । इस स्थल पर महाशिवरात्रि व् बसंत पंचमी के अवसर पर मेले का आयोजन होता है।

बरेला महादेव


दूधेश्वर महादेव

जिला मुख्यालय से २० किमी पूरब विजयगढ़ दुर्ग के करीब धर्मदासपुर गाँव की पहाड़ीमें एक संकरी गुफा हैं । इसी गुफा को कुछ साल पहले एक मुस्लिम युवक ने खोजा । अन्दर जाने पर उसे एक शिवलिंग दिखाई दिया । उसने इसकी जानकारी गाँव में आकर दी । इसके बाद वहां लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई .

गिरिजाशंकर महादेव कंडा कोट

जिला मुख्यालय से ८ किमी पक्षिम उची चोटी पर स्थित लगभग ३०० वर्ष पुरानें मन्दिर में गिरिजाशंकर महादेव की मूर्ति स्थापित है । इस मूर्ति को देखने से लगता है की यह कभी अघोर साधक रहते रहें होगें । यहाँ हर साल वसंत पंचमी ,शिवरात्री व् आषाढ़ शुक्लपक्ष को मेला लगता है । पहाड़ के नीचे से मन्दिर तक पहुचनें के लिए सदर ब्लाक प्रमुख कमलाकांत पाण्डेय व् उनके सहयोगियों द्वारा सीढ़ी का निरमाण कराया गया है । लोगो की मान्यता है की यहाँ सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं ।

गुप्तेश्वर महादेव


जिला मुख्यालय से ७० किमी दक्षिण पूर्व के कोने पर सोननदी के किनारे गुप्तेश्वर महादेव एक गुफा में स्थित हैं । कोन बाजार से ७ किमी चांची गाँव से सोननदी पार कर यहाँ तक पहुंचा जा सकता है । नदी के ठीक किनारे स्थित पहाड़ की ऊँची चोटी पर एक गुफा में लगभग १५० मीटर अन्दर जाने पर प्राकृतिक रूप से बना शिवलिंग है । गुफा का आकार काफी विशाल है । उसका सम्बन्ध लोग विजयगढ़ दुर्ग व चुनार दुर्ग से भी बताते हैं । गुफा में २०० मीटर के आगे आज तक कोई नहीं जा पाया है । इस स्थान पर एम् एल सी जयप्रकाश चतुर्वेदी द्वारा एक यात्री सेड का तथा गुफा तक पहुँचने के लिए सीढ़ी का निर्माण कराया गया है । इस गुफा का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है । यहाँ बसंत पंचमी व शिवरात्री के अवसर पर मेले का आयोजन होता है । इसमे बिहार व झारखंड के हजारों लोग शामिल होते हैं ।